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Acharya Lokesh addressed after 125 years of Swami Vivekananda at Historic auditorium of Chicago University India has key role in world unity and peace - Acharya Lokesh

12-09-2018

At the historic auditorium of Chicago, where Swami Vivekanandji addressed the gathering 125 years back, the inaugural function of International Conference was addressed by Founder of Ahimsa Vishwa Bharti HH Acharya Dr Lokesh Muni ji. On 125th anniversary of Swami Vivrkanad address in Chicago, Consulate General of India in Chicago, Neeta Bhushan, Secretary General of the World Religious Parliament Dr. Larry Greenfield was also present. The three day conference World Congress of Vedic Foundations of Management Science was organised by Integrated Spiritual and Organisational Leadership Foundation (ISOL) in the leadership of Chair by Mr. Bhailal Patel and Conference Chair Prof. Sunita Singh Sengupta, Conference attended by prominent personalities from across the world. Acharya Lokesh on this occasion said that India can play an important role in the establishment of world unity and peace. In India, people of different religions, castes and lifestyle live together. 125 years ago Swami Vivekanand expressed Indian philosophy in front of the world in this auditorium and today I have got this opportunity. He said that for world welfare we should leave behind our selfishness and awaken the consciousness of welfare of all within. Acharya Lokesh told that he had represented Jainism in the Parliament of World’s Religions held in Salt Lake City in 2015 and will represent Jainism in the Parliament of World’s Religions organized in November this year in Toronto. It is possible to solve many global problems by adopting the Jainism principles of non-violence, unity in diversity and non-possession. Consulate General of India in Chicago, Neeta Bhushan said that the US has always welcomed Indian saints and ideas of India. India and America can work together for world peace and religious harmony. For this, we have to promote inter religious dialogue at global level. Dr. Larry Greenfield, Secretary-General of the World Religions Parliament said that when saints and thinkers of different religions give a message of human welfare and global unity from a stage, it will definitely have an impact. When people gather on a platform for any common purpose, when they are motivated by the common values, then we can create a better society. The Parliament of World’s Religions is a platform for interreligious dialogue and inter cultural harmony. World population has spiritual and interfaith needs. Attempts are being made to meet both requirements through this platform. Chancellor KR Mangalam University Prof. Dinesh Singh, Dr H P Kanoriya, Dr Bharat Barai, Prof. Sunita Singh Sengupta, Sunayana, Ashok Vyas and many eminent people expressed their views on the occasion.

शिकागो यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक सभागार में स्वामी विवेकानंद के 125 वर्ष बाद आचार्य लोकेश ने सभा को संबोधित किया विश्व एकता और शांति स्थापना में भारत की अहम भूमिका - आचार्य लोकेश

शिकागो यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक सभागार में जहाँ स्वामी विवेकानंदजी नें 125 वर्ष पूर्व संबोधन दिया था उसकी 125 वीं वर्षगांठ पर आयोजित त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक पूज्य आचार्य डॉ लोकेशमुनि जी ने संबोधित किया | इस अवसर पर शिकागो में भारत की राजदूत नीता भूषण , विश्व धर्म संसद के महासचिव डा. लार्री ग्रीनफ़ील्ड, उपस्थित थे | इंटीग्रेटेड स्पिरिचुअल एंड ओरगेनाईजेश्नल लीडरशिप फाउंडेशन (ISOL)द्वारा चेयर श्री भाईलाल पटेल और कांफ्रेंस चेयर प्रोफ. सुनीता सिंह सेनगुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ़ वैदिक फाउंडेशन ऑफ़ मैनेजमेंट साइंस (World Congress of Vedic Foundations of Management Science) कांफ्रेंस में विश्व के कोने कोने से प्रख्यात महानुभावों ने भाग लिया | आचार्य लोकेश ने इस अवसर पर कहा कि विश्व एकता और शांति की स्थापना में भारत अहम भूमिका निभा सकता है| भारत में विभिन्न धर्म, जाति, जीवन शैली के लोग एकसाथ रहते यही | 125 वर्ष पूर्व पहले स्वामी विबेकानंद ने इसी सभागार में भारत भूमि के विचारों को विश्व के समक्ष रखा और आज मुझे यह अवसर मिला है | उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण के लिए जरुरी है हम स्वार्थ की भावना से दूर होकर अपने अन्दर परमार्थ की चेतना को जगाना होगा | आचार्य लोकेश ने बताया कि उन्होंने 2015 में साल्ट लेक सिटी में आयोजित विश्व धर्म संसद में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था और इस वर्ष टोरंटो में नवम्बर माह में आयोजित हो रही विश्व धर्म संसद में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करेंगे | जैन धर्म द्वारा प्रतिपादित अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह जैसे सिद्धांतो को अपनाने से अनेक वैश्विक समस्याओं का समाधान संभव है | भारत की राजदूत नीता भूषण ने कहा की अमेरिका ने भारतीय संतो और भारत के विचारों का हमेशा स्वागत किया है | भारत और अमेरिका एकसाथ काम कर विश्व शांति और धार्मिक सद्भावना की स्थापना कर सकते है | इसके लिए हमें वैश्विक स्तर पर अंतर्धार्मिक संवाद को बढ़ावा देना होगा | विश्व धर्म संसद के महासचिव डा. लार्री ग्रीनफ़ील्ड ने कहा कि विभिन्न धर्म के संत और विचारक जब एक मंच से मानव कल्याण और वैश्विक एकता का सन्देश देंगे तो इसका निश्चित रूप से प्रभाव होगा | जब लोग किसी साझा उद्देश्य के लिए एक मंच पर एकत्रित होते हैं, साझा मूल्यों से प्रेरित होते हैं, तो समाज के लिए बेहतर काम होते हैं। विश्व धर्म संसद सर्वधर्म सद्भाव और मानव कल्याण के लिए एक मंच के रूप में है। विश्व जनमानस की आध्यात्मिक और पंथ निरपेक्ष दोनों आवश्यकताएं हैं। इस मंच के माध्यम से दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति करने का प्रयास है | इस अवसर पर के.आर. मंगलम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश सिंह, डा. एच.पी.कनोरिया, डा. भारत बराई, सुनीता सिंह सेनगुप्ता, सुनयना, अशोक व्यास आदि अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किये |