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Acharya Lokesh Addressed ‘Non Violence And Peaceful Coexistence’ On International Yoga Day At Temple In New York

12-07-2018

Yoga leads to Peace of Mind and World Peace- Acharya Lokesh Founder of Ahimsa Vishwa Bharti Acharya Dr. Lokesh Muni during his Peace, Harmony and Yoga tour to USA addressed the seminar ‘Non-Violence and Peaceful-Coexistence’ as Chief guest and Key Note speaker organised by Mahatma Gandhi Peace Foundation to celebrate International Yoga Day. People were amazed to see small children performing Yoga in the program organised at Sarvamangala Shri Saneeswara Temple New York. Prof. Bipin Sangankar gave Acharya Dr. Lokesh Muni Ji’s introduction and Mrs. Umsa Sen Gupta welcomed Acharya Ji. Shri Vishal Khera presented music and Shridhar ji was also present on the occasion. Ambassador of Peace Jain Acharya Dr. Lokesh Muni delivering the inaugural speech said that peace of mind should be achieved before world peace. Peace of mind can be achieved through Yoga. Yoga by different members of the society leads to world peace. Acharya Lokesh quoting Bhagwan Mahavir philosophy said that the principle of non-violence says that violence gives rise to counter violence. War, violence and terrorism cannot solve any problem. All problems can be solved through dialogue. Unity in diversity philosophy says that we should respect the existence and ideas of others as our own existence. The non possessiveness principle says that if your brother is hungry and you eat a lot then you are not entitles for Moksha or ultimate salvation. He said that by adapting principles of Lord Mahavira into life, we can create peaceful society. Acharya Lokesh in the presence of large gathering emphasising the importance of Peace Education and Training of Non Violece said that Value Based and Peace Education should be integral part of education system so that cultural generation can be created. Peace education can be foundation for Wold Peace. War is first created in mind then fought on ground. There is a need train human mind in a way so that it constantly make effort towards establishing Peace and Harmony. Thanks & Regards, Kenu A. Sharma, Media Secretary, 9013346446

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आचार्य लोकेश ने न्यूयॉर्क में योग के महत्त्व के साथ ‘अहिंसा व शांतिपूर्ण सहस्तित्व’ पर सन्देश दिया

योग के माध्यम से मन की शांति व विश्व शांति संभव – आचार्य लोकेश अमेरिका की शांति, सद्भावना व योग यात्रा के दौरान अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश ने न्यूयॉर्क में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर महात्मा गाँधी पीस फाउंडेशन इंटरनेशनल द्वारा ‘अहिंसा व शांतिपूर्ण सहस्तित्व’ विषय को मुख्य अथिति व प्रमुख वक्ता के रूप में संबोधित किया | न्यूयॉर्क के सर्वमंगल श्री सनेस्वर मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में नन्हे मुन्हे बच्चों ने योग कर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया | कार्यक्रम में प्रो. बिपिन संगन्कर ने आचार्य लोकेश मुनि जी का परिचय दिया व श्रीमती उमासेन गुप्ता ने आचार्य जी का स्वागत किया | इस अवसर पर श्री विशाल खेरा ने संगीत प्रस्तुत किया | श्रीधर जी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे | शान्तिदूत जैन आचार्य लोकेश मुनि ने उदघाटन भाषण में कहा कि विश्व शांति से पहले मन की शांति आवश्यक है | योग के माध्यम से मन की शांति हासिल की जा सकती है | योग के माध्यम से मान की शांति के साथ विश्व शांति स्थापित करना संभव है | आचार्य लोकेश ने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा का सिद्धांत कहता है हिंसा प्रतिहिंसा को जन्म देती है, युद्ध, हिंसा और आतंकवाद किसी समस्या का समाधान नहीं है| संवाद के द्वारा हर समस्या का समाधान मुमकिन है| अनेकांत दर्शन कहता है कि हम अपने अस्तित्व की तरह दूसरों के अस्तित्व और विचारों का सम्मान करना सीखे| अपरिग्रह सिद्धांत कहता है कि तुम्हारा भाई भूखा सोता है और तुम भरपेट खाते हो तो तुम मोक्ष के अधिकारी नहीं हों | उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतार कर हम समाज में शांतिपूर्ण सहस्तित्व स्थापित कर सकते है| आचार्य लोकेश ने विशाल जनसमूह के समक्ष पीस एजुकेशन व अहिंसा प्रशिक्षण के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मूल्य परक एवं पीस एजुकेशन को शिक्षा में शामिल करना चाहिए ताकि हम एक संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण कर सके | पीस एजुकेशन विश्व शांति का आधार बन सकती है | युद्ध पहले मस्तिष्क में उत्पन्न होता है फिर मैदान में लड़ा जाता है | आवश्यकता है मस्तिष्क को इस प्रकार से शिक्षित करने की जिससे वो शांति व सद्भावना की स्थापना के लिए निरंतर प्रयासरत रहे | सधन्यवाद, केनु अ. शर्मा, मिडिया सचिव, 9811025332